“द हिन्दी” डेस्क….
कैथोलिक डायसिस झाबुआ के बिशप बसील भूरिया का गुरुवार दोपहर 1:00 बजे इंदौर में उपचार के दौरान निधन हो गया। श्री भूरिया के निधन के समाचार मिलते ही झाबुआ डायसिस एवं समाजजनों में शोक की लहर छा गई। नगर के गणमान्य नागरिकों ने श्री भूरिया को श्रद्धाजंलि अर्पित की…..वे नीमच , मन्दसौर , झाबुआ , अलीराजपुर और रतलाम जिले के बिशप थे….
ऐसी थी शिक्षा दीक्षा –
फादर बसील भूरिया का जन्म 8 मार्च 1956 को पंचकुई पल्ली के ग्राम घोसलिया में हुआ। आपके पिता स्वर्गीय योहन धनसिंह भूरिया ओर माता स्वर्गीय अगनेश डोडियार के 8 बच्चों में आप सबसे बड़े थे। आप की प्रारंभिक शिक्षा संत टेरेसा स्कूल पंचकुई में हुई। आपने अपनी बुलाहट को पहचाना और उसे निखारने के लिए 1969 में संत थॉमस सेमनेरी महू में प्रवेश लिया।
1980 में खुर्दा के एस वी डी नोवीशिएट में पहला व्रत लिया। 1980-82 में ज्ञानदीप विद्यापीठ पुणे से दर्शनशास्त्र की उपाधि प्राप्त की। 1983-86 ईशशास्त्र का गहन अध्ययन भी किया। 2 मई 1986 में आपका पुरोहित अभिषेक स्वर्गीय बिशप जार्ज अनाथिल एस वी डी के कर कमलों द्वारा हुआ। आपने कई पल्लीयो में पुरोहित के रूप में अपनी सेवाएं दी जिसमें मोवालिया, महू, थांदला, धार, राजगढ़ आदि शामिल है। 18 जुलाई 2015 को संत पिता फ्रांसिस ने आपको झाबुआ डायसिस का तीसरा बिशप नियुक्त किया था। 2015 से कार्यभार संभालने के बाद श्री भूरिया ने कैथोलिक डायसिस झाबुआ संस्था के माध्यम से विभिन्न कार्य किये। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान के कार्यो के साथ सर्व धर्म समभाव बनाए रखने के लिए भी अनेक कार्य किए। नगर के समाजसेवी एवं सामाजिक संगठनो के साथ मिलकर उन्होंने सामाजिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्लास्टिक सर्जरी केम्प जैसा बड़े स्वास्थ्य शिविर में भी बढ़ चढ़ कर सहयोग किया। आप बेहद साधारण एवं मधुर भाषी व्यक्तित्व के धनी थे। विगत कुछ दिनों पूर्व अस्वस्थता के चलते इंदौर के संत फ्रांसिस हॉस्पिटल एवं दिनांक 15 अप्रेल से चोइथराम हॉस्पिटल में आपका इलाज चल रहा था। 6 मई को दोपहर करीब 1 बजे ह्दयघात होने से आपका निधन हो गया। ” द हिन्दी ” परिवार भी उनको श्रद्धाजंलि अर्पित करता है….